ग़ज़ल
खेलत खिलार गुन-आगर उदार राधा
खेलत खिलार गुन-आगर उदार राधानागरि छबीली फाग-राग सरसात है ।भाग भरे भाँवते सों, औसर फव्यौ है आनि,’आनँद के घन’ की घमंड दरसात है ॥औचक निसंक अंक चोंप खेल धूँधरि सिहात है ।केसू रंग ढोरि गोरे कर स्यामसुंदर कों,गोरी स्याम रंग बीचि बूड़ि-बूड़ि जात है ॥
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