ग़ज़ल

पहिले अपनाय सुजान सनेह सों

घनानंद · सब कलाम देखें
पहिले अपनाय सुजान सनेह सों क्यों फिरि तेहिकै तोरियै जू.निरधार अधार है झार मंझार दई, गहि बाँह न बोरिये जू .‘घनआनन्द’ अपने चातक कों गुन बाँधिकै मोह न छोरियै जू .रसप्याय कै ज्याय,बढाए कै प्यास,बिसास मैं यों बिस धोरियै जू .
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