ग़ज़ल

जिन आँखिन रूप-चिह्नारि

घनानंद · सब कलाम देखें
जिन आँखिन रूप-चिन्हार भई,तिनको नित ही दहि जागनिहै.हित-पीरसों पूरित जो हियरा,फिरि ताहि कहाँ कहु लागनिहै.‘घनआनन्द’ प्यारे सुजान सुनौ,जियराहि सदा दुख दागनि है.सुख में मुख चंद बिना निरखे,नखते सिख लौं बिख पागनि है.
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