ग़ज़ल

कूर मिले मगरूर मिले

बोधा · सब कलाम देखें
कूर मिले मगरूर मिले, रनसूर मिले धरे सूर प्रभा को।ज्ञानी मिले औ गुमानी मिले, सनमानी मिले छबिदार पता को॥
राजा मिले अरु रंक मिले, 'कवि बोधा मिले निरसंक महा को।और अनेक मिले तौ कहा, नर सो न मिल्यो मन चाहत जाको॥
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh