ग़ज़ल

हिलि मिलि जानै तासोँ मिलिकै जनावै हेत

बोधा · सब कलाम देखें
हिलि मिलि जानै तासोँ मिलिकै जनावै हेत ,हित को न जानै ताको हितू न बिसाहिये ।होय मगरूर तापै दूनी मगरूरी कीजै ,लघु ह्वै चलै जो तासोँ लघुता निबाहिये ।बोधा कवि नीति को निबेरो यही भाँति यहै ,आपको सराहै ताहि आपहूँ सराहिये ।दाता कहा सूम कहा सुँदर सुजान कहा ,आपको न चाहै ताके बाप को न चाहिये ।
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