ग़ज़ल
काँपत गात सकात बतात है साँकरी खोरि निशा अँधियारी
काँपत गात सकात बतात है साँकरी खोरि निशा अँधियारी ।पातहू के खरके छरकै धरकै उर लाय रहै सुकुमारी ।बीच मे बोधा रचै रस रीति मनौ जग जीति चुक्यो तेँहि बारी ।योँ दुरि केलि करै जग मेँ नर धन्य वहै धनि है वह नारी ।
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