ग़ज़ल
नील पर कटि तट
नील पर कटि तट जटनि दै मेरी आली,:::लटुन सी साँवरी रजनि सरसान दै,नूपुर उतारन किंकनी खोल डारनि दै:::धारन दै भूषन कपूर पान खान दै,सरस सिंगार कै बिहारी लालै बसि करौ:::बसि न करि सकै ज्यौं आन प्रिय प्रान दै,तौ लगि तू धीर धर एतौ मेरौ कह्यौ करि:::चलिहौं कन्हैया पै जुन्हैया नैंकु जानि दै।।
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