ग़ज़ल

खेलत फाग दुहूँ तिय कौ

बिहारी · सब कलाम देखें
खेलत फाग दुहूँ तिय कौ मन राखिबै कौ कियौ दाँव नवीनौप्यार जनाय घरैंनु सौं लै, भरि मूँठि गुलाल दुहूँ दृग दीनौलोचन मीडै उतै उत बेसु, इतै मैं मनोरथ पूरन कीनौनागर नैंक नवोढ़ त्रिया, उर लाय चटाक दै चूँबन लीनौ।
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