ग़ज़ल

केसरि से बरन सुबरन

बिहारी · सब कलाम देखें
केसरि से बरन सुबरन बरन जीत्यौ:::बरनीं न जाइ अवरन बै गई।कहत बिहारी सुठि सरस पयूष हू तैं,:::उष हू तैं मीठै बैनन बितै गई।भौंहिनि नचाइ मृदु मुसिकाइ दावभाव:::चचंल चलाप चब चेरी चितै कै गई।लीने कर बेली अलबेली सु अकेली तिय:::जाबन कौं आई जिय जावन सौं दे गई।।
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh