ग़ज़ल
वंस बड़ौ बड़ी संगति पाइ
वंस बड़ौ बड़ी संगति पाइ, बड़ाई बड़ी खरी यौ जग झेली।
साँप फुकारन सीस रसारनु है सबसे जिय ऊपर खेली।
बाइक एक ही बार उजारि कै मारि सबै ब्रज नारि नवेली।
मोहन संग तू लै जसुरी, बसु (री) बँसुरी ब्रज आइ अकेली।।
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