ग़ज़ल

जानत नहिं लगि मैं

बिहारी · सब कलाम देखें
जानत नहिं लगि मैं मानिहौं बिलगि कहै:::तुम तौ बधात ही तै वहै नाँध नाध्यौ है।लीजिये न छेहु निरगुन सौं न होइ नेहु:::परबस देहु गेहु ये ही सुख साँध्यौ है।गोकुल के लोग पैं गुपाल न बिसार्यौ जाइ:::रावरे कहे तौ क्यौं हूँ जोगो काँध काँध्यौ है।कीजिए न रारि ऊधौ देखिये विचारि काहु:::हीरा छोड़ि डारि कै कसीरा गाँठि बाँध्यौ है।।
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