ग़ज़ल
कुछ तो मैं भी बहुत दिल का कमज़ोर हूँ
कुछ तो मैं भी बहुत दिल का कमज़ोर हूँकुछ मुहब्बत भी है फ़ितरतन बदगुमाँ
तज़करा कोई हो ज़िक्र तेरा रहाअव्वल-ए-आख़िरश दरमियाँ दरमियाँ
जाने किस देश से दिल में आ जाते हैंचांदनी रात में दर्द के कारवाँ
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