ग़ज़ल
ख़ुश रहे या बहुत उदास रहे
ख़ुश रहे या बहुत उदास रहेज़िन्दगी तेरे आस पास रहे
चाँद इन बदलियों से निकलेगाकोई आयेगा दिल को आस रहे
हम मुहब्बत के फूल हैं शायदकोई काँटा भी आस पास रहे
मेरे सीने में इस तरह बस जामेरी सांसों में तेरी बास रहे
आज हम सब के साथ ख़ूब हँसेऔर फिर देर तक उदास रहे
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