ग़ज़ल

आस होगी न आसरा होगा

बशीर बद्र · सब कलाम देखें
आस होगी न आसरा होगाआने वाले दिनों में क्या होगा
मैं तुझे भूल जाऊँगा इक दिनवक़्त सब कुछ बदल चुका होगा
नाम हम ने लिखा था आँखों मेंआँसुओं ने मिटा दिया होगा
आसमाँ भर गया परिंदों सेपेड़ कोई हरा गिरा होगा
कितना दुश्वार था सफ़र उस कावो सर-ए-शाम सो गया होगा
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