ग़ज़ल

ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में

बशीर बद्र · सब कलाम देखें
ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं मेंमाँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में
तुम छत पे नहीं आये वो घर से नहीं निकलाये चाँद बहुत लटका सावन की घटाओं में
इस शहर में इक लड़की बिल्कुल है ग़ज़ल जैसीफूलों की बदन वाली ख़ुशबू-सी अदाओं में
दुनिया की तरह वो भी हँसते हैं मुहब्बत परडूबे हुए रहते थे जो लोग वफ़ाओं में
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