ग़ज़ल

इन आंखों से दिन रात बरसात होगी

बशीर बद्र · सब कलाम देखें
इन आँखों से दिन-रात बरसात होगीअगर ज़िंदगी सर्फ़-ए-जज़्बात होगी
मुसाफ़िर हो तुम भी, मुसाफ़िर हैं हम भीकिसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
सदाओं को अल्फाज़ मिलने न पायेंन बादल घिरेंगे न बरसात होगी
चराग़ों को आँखों में महफूज़ रखनाबड़ी दूर तक रात ही रात होगी
अज़ल-ता-अब्द तक सफ़र ही सफ़र हैकहीं सुबह होगी कहीं रात होगी
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