ग़ज़ल
उस दर का दरबान बना दे या अल्लाह
उस दर का दरबान बना दे या अल्लाहमुझको भी सुल्तान बना दे या अल्लाह
इन आँखों से तेरे नाम की बारिश होपत्थर हूँ, इन्सान बना दे या अल्लाह
सहमा दिल, टूटी कश्ती, चढ़ता दरयाहर मुश्किल आसान बना दे या अल्लाह
मैं जब चाहूँ झाँक के तुझको देख सकूँदिल को रोशनदान बना दे या अल्लाह
मेरा बच्चा सादा काग़ज़ जैसा हैइक हर्फ़े ईमान बना दे या अल्लाह
चाँद-सितारे झुक कर क़दमों को चूमेंऐसा हिन्दोस्तान बना दे या अल्लाह
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