ग़ज़ल

तुम हो कि एक तर्ज़े-सितम पर नहीं क़रार

आरज़ू लखनवी · सब कलाम देखें
तुम हो कि एक तर्ज़े-सितम पर नहीं क़रार।हम हैं कि पायेबन्द हरेक इम्तहाँ के हैं॥
हों सर्फ़ तीलियों में क़फ़स के तो ख़ौफ़ है।तिनके जो मेरे उजड़े हुए आशियाँ के हैं॥
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