ग़ज़ल

अलअमाँ मेरे ग़मकदे की शाम

आरज़ू लखनवी · सब कलाम देखें
अलअमाँ मेरे ग़मकदे की शाम।सुर्ख़ शोअ़ला सियाह हो जाये॥
पाक निकले वहाँ से कौन जहाँ ।उज़्रख़्वाही गुनाह हो जाये॥
इन्तहाये-करम वो है कि जहाँ।बेगुनाही गुनाह हो जाये॥
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