ग़ज़ल
अब मुझको फ़ायदा हो दवा-ओ-दुआ से क्या
अब मुझ को फ़ायदा हो दवा-ओ-दुआ से क्या?वो मुँह पे कह गए--"यह मर्ज़ लाइलाज है"॥
इज़्ज़त कुछ और शय है, नुमाइश कुछ और चीज़।यूँ तो यहाँ खूरोस के सर पर भी ताज है॥
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