ग़ज़ल

न यह कहो "तेरी तक़दीर का हूँ मै मालिक"

आरज़ू लखनवी · सब कलाम देखें
न यह कहो "तेरी तक़दीर का हूँ मैं मालिक।बनो जो चाहो ख़ुदा के लिए, ख़ुदा न बनो॥
अगर है जुर्मे-मुहब्बत तो ख़ैर यूँ ही सही।मगर तुम्हीं कहीं इस जुर्म की सज़ा न बनो॥
मिले भी कुछ तो है बेहतर तलब से इस्तग़ना।बनो तो शाह बनो, ‘आरज़ू’! गदा न बनो॥
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