ग़ज़ल

आके क़ासिद ने कहा जो, वही अक्सर निकला

आरज़ू लखनवी · सब कलाम देखें
आके क़ासिद ने कहा जो, वही अकसर निकला।नामाबर समझे थे हम, वह तो पयम्बर निकला॥
बाएगु़रबत कि हुई जिसके लिए खाना-खराब।सुनके आवाज़ भी घर से न वह बाहर निकला॥
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh