ग़ज़ल

ख़ुदारा! न दो बदगुमानी का मौका

आरज़ू लखनवी · सब कलाम देखें
खुदारा ! न दो बदगुमानी का मौक़ा।कहलवा के औरों से पैग़ाम अपना॥
हविसकार आशिक भी ऐसा है जैसे--वह बन्दा कि रख ले ख़ुदा नाम अपना॥
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.