ग़ज़ल

इश्क़ में जाँ से गुज़रते हैं गुज़रने वाले

अमीर मीनाई · सब कलाम देखें
इश्क़ में जाँ से गुज़रते हैं गुज़रने वालेमौत की राह नहीं देखते मरने वाले
आख़िरी वक़्त भी पूरा न किया वादा-ए-वस्लआप आते ही रहे मर गये मरने वाले
उठ्ठे और कूच-ए-महबूब में पहुँचे आशिक़ये मुसाफ़िर नहीं रस्ते में ठहरने वाले
जान देने का कहा मैंने तो हँसकर बोलेतुम सलामत रहो हर रोज़ के मरने वाले
आस्माँ पे जो सितारे नज़र आये 'आमीर'याद आये मुझे दाग़ अपने उभरने वाले
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