ग़ज़ल
जब से बुलबुल तूने दो तिनके लिये
जब से बुलबुल तूने दो तिनके लियेटूटती है बिजलियाँ इनके लिये
है जवानी ख़ुद जवानी का सिंगारसादगी गहना है उस सिन के लिये
कौन वीराने में देखेगा बहारफूल जंगल में खिले किनके लिये
सारी दुनिया के हैं वो मेरे सिवामैंने दुनिया छोड़ दी जिन के लिये
बाग़बाँ कलियाँ हों हल्के रंग कीभेजनी हैं एक कमसिन के लिये
सब हसीं हैं ज़ाहिदों को नापसन्दअब कोई हूर आयेगी इनके लिये
वस्ल का दिन और इतना मुख़्तसरदिन गिने जाते थे इस दिन के लिये
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