ग़ज़ल

तुन्द मै और ऐसे कमसिन के लिये

अमीर मीनाई · सब कलाम देखें
तुन्द मय और ऐसे कमसिन के लियेसाक़िया हल्की-सी ला इन के लिये
मुझ से रुख़्सत हो मेरा अहद-ए-शबाबया ख़ुदा रखना न उस दिन के लिये
है जवानी ख़ुद जवानी का सिंगारसादगी गहना है इस सिन के लिये
सब हसीं हैं ज़ाहिदों को नापसन्दअब कोई हूर आयेगी इन के लिये
वस्ल का दिन और इतना मुख़्तसरदिन गिने जाते थे इस दिन के लिये
सारी दुनिया के हैं वो मेरे सिवामैंने दुनिया छोड़ दी जिन के लिये
लाश पर इबरत ये कहती है 'अमीर'आये थे दुनिया में इस दिन के लिये
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