ग़ज़ल

जहाँ में ‘हाली’ किसी पे अपने सिवा भरोसा न कीजियेगा

अल्ताफ़ हुसैन हाली · सब कलाम देखें
जहाँ में ‘हाली’ किसी पे अपने सिवा भरोसा न कीजिएगाये भेद है अपनी ज़िन्दगी का बस इसकी चर्चा न कीजिएगा
इसी में है ख़ैर हज़रते-दिल! कि यार भूला हुआ है हमकोकरे वो याद इसकी भूल कर भी कभी तमन्ना न कीजिएगा
कहे अगर कोई तुझसे वाइज़! कि कहते कुछ और करते हो कुछज़माने की ख़ू है नुक़्ताचीनी, कुछ इसकी परवा न कीजिएगा
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