ग़ज़ल

आजु नाथ एक व्रत

विद्यापति · सब कलाम देखें
आजु नाथ एक व्रत मोहि सुख लागत हे .तोहें सिव धरि नट वेष कि डमरू बजाएव हे.भल न कहल गौरा रउरा आजु सु नाचब हे .सदा सोच मोहि होत कवन विधि बांचव हे .जे जे सोच मोहि होत कहा समुझाएव हे .रउरा जगत के नाथ कवन सोच लागएव हे .नाग ससरि भूमि खसत पुहुमि लोटायत हे .कार्तिक पोसल मजूर सेहो धरि खायत हे .अमिय चुइ भूमि खसत बघम्बर जागत हे .होत बघम्बर बाघ बसहा धरि खायत हे .टूटी खसत रुदराछ मसान जगावत हे .गौरी कहँ दुख होत विद्यापति गावत हे .
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