ग़ज़ल

उचित बसए मोर

विद्यापति · सब कलाम देखें
उचित बसए मोर मनमथ चोर !चेरिआ बुढ़िआ करए अगोर !
बारह बरख अवधि कए गेल !चारि बरख तन्हि गेलाँ भेल !
बास चाहैत होअ पथिकहु लाज !सासु ननन्द नहि अछए समाज !
सात पाँच घर तन्हि सजि देल !पिआ देसाँतर आँतर भेल !
पड़ेओस वास जोएनसत भेल !थाने थाने अवयव सबे गेल !
नुकाबिअ तिमिरक सान्धि !पड़उसिनि देअए फड़की बान्धि !
मोरा मन हे खनहि खन भाग !गमन गोपब कत मनमथ जाग !
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