ग़ज़ल

कनक-भूधर-शिखर-बासिनी

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कनक-भूधर-शिखर-बासिनीचंद्रिका-चय-चारु-हासिनिदशन-कोटि-विकास-बंकिम-तुलित-चंद्रकले ।।
क्रुद्ध-सुररिपु-बलनिपातिनिमहिष- शुम्भ-निशुम्भघातिनिभीत-भक्त-भयापनोदन -पाटव -प्रबले।।
जे देवि दुर्गे दुरिततारिणिदुर्गामारी - विमर्द -कारिणिभक्ति - नम्र - सुरासुराधिप -मंगलप्रवरे ।।
गगन - मंडल - गर्भगाहिनिसमर - भूमिषु - सिंहवाहिनिपरशु - पाश - कृपाण - सायक -संख -चक्र-धरे ।।
अष्ट - भैरवी - सँग - शालिनीस्वकर - कृत - कपाल- मालिनिदनुज - शोणित -पिशित - वर्द्धित-पारणा-रभसे।।
संसारबन्ध - निदानमोचिनीचन्द्र - भानु - कृशानु - लोचनियोगिनी - गण - गीत - शोभित -नित्यभूमि - रसे ।।
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