ग़ज़ल

अभिनव कोमल सुन्दर पात

विद्यापति · सब कलाम देखें
अभिनव कोमल सुन्दर पात।सगर कानन पहिरल पट रात।मलय-पवन डोलय बहु भांतिअपन कुसुम रसे अपनहि माति॥देखि-देखि माधव मन हुलसंत।बिरिन्दावन भेल बेकत बसंत॥कोकिल बोलाम साहर भार।मदन पाओल जग नव अधिकार॥पाइक मधुकर कर मधु पान।भमि-भमि जोहय मानिनि-मान॥दिसि-दिसि से भमि विपिन निहारि।रास बुझावय मुदित मुरारि।भनइ विद्यापति ई रस गाव।राधा-माधव अभिनव भाव॥
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