ग़ज़ल
अगहन दिन उत्तम सुख-सुन्दर घर-घर सारी
अगहन दिन उत्तम सुख-सुन्दर घर-घर सारी समायरतन बयस सँ मोन सुख सुन्दर से छोड़ने कोना जायवललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…..पूष कोठलिया ऊँच अटरिया, तकिया तुरायअतर, गुलाब, सेन्ट गमकायब अतेक मजा कहाँ पाएबललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…..माधक सेला सचे हूमेला जैब बिदेसर धामपान सुपारी जरदा खाएब घुमब शहर बजारललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…..फागून फगुआ दूनू मिली खेलब घोरब रंग अबीरललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…..अतर गुलाब, सेन्ट गमकाएब घोटि-घोटि धारब अबीरललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…..चैतहिं बेली फुलय बनबेली, अद फुलय कचनारसेहो फूल लोढि-लोढि हार बुनाएब भेजब पीयाजी के पासललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…..बैसाखक ज्वाला करे मोन ब्योला सोने मुढी बेनिया डोलारबकोमल हाथ सँ बेनिया डोलाएब अतेक मजा कहाँ पाएबललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…..जेठहिं कान्त कतय गमाओल आयल अषाढ़क मासलाल रे पलंगिया घरहिं ओछाएब सेवा करब अपारललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…..सावन-भादब के मेघबा गरजै जुनि मेघ बरसु आजुकोना क बालमु पार उतरताह नै रे नाव करुआरललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…..आसिन-कातिक के पर्व लगतु हैं सब सखी गंगा-स्नानबिना बालमुजी के नीको ने लागयपुरि गेल बारह मासललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…..
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