ग़ज़ल

एकनि के बचन सुनत

सुंदरदास · सब कलाम देखें
एकनि के बचन सुनत अति सुख होई ,फल से झरत हैं अधिक मनभावने.एकनि के बचन पखान बरषत मानौ,स्रवन कै सुनतहिं लगत अनखावन .एकनि के बचन कंटक कटुक विषरूप,करत मरम छेद, दुख उपजावने .सुंदर कहत घट-घट में बचन भेद ,उत्तम अरु मध्यम अरु अधम सुनावने.
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