ग़ज़ल

गेह तज्यो अरु नेह तज्यो

सुंदरदास · सब कलाम देखें
गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई कै देह संवारी .मेह सहे सिर, सीत सहे तन धूप समै जो पंचागिनि बारी.भूख सही रहि रूख तरे पर सुंदरदास सबै दुख भारी .डासं छांड़ीकै कासन ऊपर आसन मारयो,तै आस न मारी.
पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh