ग़ज़ल जीना अपने ही में सुमित्रानंदन पंत · सब कलाम देखें हिन्दी रोमन जीना अपने ही मेंएक महान कर्म हैजीने का हो सदुपयोगयह मनुज धर्म हैअपने ही में रहनाएक प्रबुद्ध कला हैजग के हित रहने मेंसबका सहज भला हैजग का प्यार मिले पाठ सत्यापित · Text verified against Kavita Kosh