ग़ज़ल

सभा का खेल

सुभद्रा कुमारी चौहान · सब कलाम देखें
सभा सभा का खेल आज हमखेलेंगे जीजी आओ,मैं गाधी जी, छोटे नेहरूतुम सरोजिनी बन जाओ।
मेरा तो सब काम लंगोटीगमछे से चल जाएगा,छोटे भी खद्दर का कुर्तापेटी से ले आएगा।
लेकिन जीजी तुम्हें चाहिएएक बहुत बढ़िया सारी,वह तुम माँ से ही ले लेनाआज सभा होगी भारी।
मोहन लल्ली पुलिस बनेंगेहम भाषण करने वाले,वे लाठियाँ चलाने वालेहम घायल मरने वाले।
छोटे बोला देखो भैयामैं तो मार न खाऊँगा,मुझको मारा अगर किसी नेमैं भी मार लगाऊँगा!
कहा बड़े ने-छोटे जब तुमनेहरू जी बन जाओगे,गांधी जी की बात मानकरक्या तुम मार न खाओगे?
खेल खेल में छोटे भैयाहोगी झूठमूठ की मार,चोट न आएगी नेहरू जीअब तुम हो जाओ तैयार।
हुई सभा प्रारम्भ, कहागांधी ने चरखा चलवाओ,नेहरू जी भी बोले भाईखद्दर पहनो पहनाओ।
उठकर फिर देवी सरोजिनीधीरे से बोलीं, बहनो!हिन्दू मुस्लिम मेल बढ़ाओसभी शुद्ध खद्दर पहनो।
छोड़ो सभी विदेशी चीजेंलो देशी सूई तागा,इतने में लौटे काका जीनेहरू सीट छोड़ भागा।
काका आए, काका आएचलो सिनेमा जाएँगे,घोरी दीक्षित को देखेंगेकेक-मिठाई खाएँगे!
जीजी, चलो, सभा फिर होगीअभी सिनेमा है जाना,आओ, खेल बहुत अच्छा हैफिर सरोजिनी बन जाना।
चलो चलें, अब जरा देर कोघोरी दीक्षित बन जाएँ,उछलें-कूदें शोर मचावेंमोटर गाड़ी दौड़ावें!
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.