ग़ज़ल
प्रियतम से
बहुत दिनों तक हुई परीक्षाअब रूखा व्यवहार न हो।अजी, बोल तो लिया करो तुमचाहे मुझ पर प्यार न हो॥
जरा जरा सी बातों परमत रूठो मेरे अभिमानी।लो प्रसन्न हो जाओगलती मैंने अपनी सब मानी॥
मैं भूलों की भरी पिटारीऔर दया के तुम आगार।सदा दिखाई दो तुम हँसतेचाहे मुझ से करो न प्यार॥
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.