ग़ज़ल

मेरा जीवन

सुभद्रा कुमारी चौहान · सब कलाम देखें
मैंने हँसना सीखा हैमैं नहीं जानती रोना;बरसा करता पल-पल परमेरे जीवन में सोना।
मैं अब तक जान न पाईकैसी होती है पीडा;हँस-हँस जीवन मेंकैसे करती है चिंता क्रिडा।
जग है असार सुनती हूँ,मुझको सुख-सार दिखाता;मेरी आँखों के आगेसुख का सागर लहराता।
उत्साह, उमंग निरंतररहते मेरे जीवन में,उल्लास विजय का हँसतामेरे मतवाले मन में।
आशा आलोकित करतीमेरे जीवन को प्रतिक्षणहैं स्वर्ण-सूत्र से वलयितमेरी असफलता के घन।
सुख-भरे सुनले बादलरहते हैं मुझको घेरे;विश्वास, प्रेम, साहस हैंजीवन के साथी मेरे।
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