ग़ज़ल

उल्लास

सुभद्रा कुमारी चौहान · सब कलाम देखें
शैशव के सुन्दर प्रभात कामैंने नव विकास देखा।यौवन की मादक लाली मेंजीवन का हुलास देखा।।
जग-झंझा-झकोर मेंआशा-लतिका का विलास देखा।आकांक्षा, उत्साह, प्रेम काक्रम-क्रम से प्रकाश देखा।।
जीवन में न निराशा मुझकोकभी रुलाने को आयी।जग झूठा है यह विरक्ति भीनहीं सिखाने को आयी।।
अरिदल की पहिचान करानेनहीं घृणा आने पायी।नहीं अशान्ति हृदय तक अपनीभीषणता लाने पायी।।
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.