ग़ज़ल

फूल के प्रति

सुभद्रा कुमारी चौहान · सब कलाम देखें
डाल पर के मुरझाए फूल!हृदय में मत कर वृथा गुमान।नहीं है सुमन कुंज में अभीइसी से है तेरा सम्मान॥
मधुप जो करते अनुनय विनयबने तेरे चरणों के दास।नई कलियों को खिलती देखनहीं आवेंगे तेरे पास॥
सहेगा कैसे वह अपमान?उठेगी वृथा हृदय में शूल।भुलावा है, मत करना गर्वडाल पर के मुरझाए फूल॥
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