ग़ज़ल

मातृ-मन्दिर में

सुभद्रा कुमारी चौहान · सब कलाम देखें
वीणा बज-सी उठी, खुल गए नेत्रऔर कुछ आया ध्यान।मुड़ने की थी देर, दिख पड़ाउत्सव का प्यारा सामान ।।
जिनको तुतला-तुतला करकेशुरू किया था पहली बार।जिस प्यारी भाषा में हमकोप्राप्त हुआ है माँ का प्यार ।।
उस हिन्दू जन की गरीबिनीहिन्दी प्यारी हिन्दी का।प्यारे भारतवर्ष -कृष्ण कीउस प्यारी कालिन्दी का ।।
है उसका ही समारोह यहउसका ही उत्सव प्यारा।मैं आश्चर्य-भरी आँखों सेदेख रही हूँ यह सारा ।।
जिस प्रकार कंगाल-बालिकाअपनी माँ धनहीना को।टुकड़ों की मोहताज़ आजतकदुखिनी को उस दीना को ।।
सुन्दर वस्त्राभूषण-सज्जित,देख चकित हो जाती है।सच है या केवल सपना है,कहती है, रुक जाती है ।।
पर सुन्दर लगती है, इच्छायह होती है कर ले प्यार ।प्यारे चरणों पर बलि जाएकर ले मन भर के मनुहार ।।
इच्छा प्रबल हुई, माता केपास दौड़ कर जाती है ।वस्त्रों को सँवारती उसकोआभूषण पहनाती है ।
उसी भाँति आश्चर्य मोदमय,आज मुझे झिझकाता है ।मन में उमड़ा हुआ भाव बस,मुँह तक आ रुक जाता है ।।
प्रेमोन्मत्ता होकर तेरे पासदौड़ आती हूँ मैं ।तुझे सजाने या सँवारनेमें ही सुख पाती हूँ मैं ।।
तेरी इस महानता में,क्या होगा मूल्य सजाने का ?तेरी भव्य मूर्ति को नकलीआभूषण पहनाने का ?
किन्तु हुआ क्या माता ! मैं भीतो हूँ तेरी ही सन्तान ।इसमें ही सन्तोष मुझे हैइसमें ही आनन्द महान ।।
मुझ-सी एक-एक की बन तूतीस कोटि की आज हुई ।हुई महान, सभी भाषाओं —की तू ही सरताज हुई ।।
मेरे लिए बड़े गौरव कीऔर गर्व की है यह बात ।तेरे ही द्वारा होवेगा,भारत में स्वातन्त्रय-प्रभात ।।
असहयोग पर मर-मिट जानायह जीवन तेरा होगा ।हम होंगे स्वाधीन, विश्व कावैभव धन तेरा होगा ।।
जगती के वीरों-द्वाराशुभ पदवन्दन तेरा होगा !देवी के पुष्पों द्वाराअब अभिनन्दन तेरा होगा ।।
तू होगी आधार, देश कीपार्लमेण्ट बन जाने में ।तू होगी सुख-सार, देश केउजड़े क्षेत्र बसाने में ।।
तू होगी व्यवहार, देश केबिछड़े हृदय मिलाने में ।तू होगी अधिकार, देशभर —को स्वातन्त्रय दिलाने में ।।
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.