ग़ज़ल

मुरझाया फूल

सुभद्रा कुमारी चौहान · सब कलाम देखें
यह मुरझाया हुआ फूल है,इसका हृदय दुखाना मत।स्वयं बिखरने वाली इसकीपंखड़ियाँ बिखराना मत॥
गुजरो अगर पास से इसकेइसे चोट पहुँचाना मत।जीवन की अंतिम घड़ियों मेंदेखो, इसे रुलाना मत॥
अगर हो सके तो ठंडीबूँदें टपका देना प्यारे!जल न जाए संतप्त-हृदयशीतलता ला देना प्यारे!!
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.