ग़ज़ल

गिरफ़्तार होने वाले हैं

सुभद्रा कुमारी चौहान · सब कलाम देखें
‘‘गिरफ़्तार होने वाले हैं, आता है वारंट अभी॥’’धक-सा हुआ हृदय, मैं सहमी, हुए विकल साशंक सभी॥किन्तु सामने दीख पड़े मुस्कुरा रहे थे खड़े-खड़े।रुके नहीं, आँखों से आँसू सहसा टपके बड़े-बड़े॥‘‘पगली, यों ही दूर करेगी माता का यह रौरव कष्ट?’’‘रुका वेग भावों का, दीखा अहा मुझे यह गौरव स्पष्ट॥
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