ग़ज़ल
कब
प्रियतम कब आवेंगे,--कब?कुछ भी देर हुई तो मेरेसुमन सूख जावेंगे सब।
सखि, तब ये तूने किस बल परचुन रक्खे प्रसून अंचल भर,नहीं ठहर सकते जो पल भर?
शीघ्र सूख जाने वाले थेसुमन सूख जावेंगे जब,प्रियतम तब आवेंगे,--तब!प्रियतम कब आवेंगे,--कब?कुछ भी देर हुई तो मेरेदीनक सो जावेंगे सब!
सखि, सब सजग स्नेह से खाली,दीपावलि किसलिए उजाली,रहे न क्षण भर जिसकी लाली?
सत्वर सो जाने वाले थेदीपक सो जावेंगे जब,प्रियतम तब आवेंगे,--तब!
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