ग़ज़ल

असमय

सियारामशरण गुप्त · सब कलाम देखें
ये जीव-जंतुगण पा कर तीव्र क्लेश,हैं हो चुके अहह नीरद! भस्म-शेष।दावाग्नि से जल चुका वन प्रांत सारा,बरसा रहे अब किस लिये वारि-धारा?
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