ग़ज़ल

सेनापति उनए नए जलद सावन के

सेनापति · सब कलाम देखें
सेनापति उनए नए जलद सावन केचारिहू दिसान घुमरत भरे तोय कै.सोभा सरसाने न बखाने जात कैहूँ भाँतिआने हैं पहार मानो काजर के ढोय कै.घन सों गगन छप्यो, तिमिर सघन भयो,देखि न परत मानो रवि गयो खोय कै.चारि मास भरि स्याम निसा को भरम मानि,मेरे जान याही तें रहत हरि सोय कै.
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