ग़ज़ल
नाहीं नाहीं करै
नाहीं नाहीं करै,थोडो माँगे सब दैन कहै,मंगल को देखि पट देत बार बार है .जिनके मिलत भली प्रापति की घटी होति,सदा शुभ जनमन भावै निरधार है .भोगी ह्वै रहत बिलसत अवनी के मध्य,कन कन जोरै, दान पाठ परवार है.सेनापति वचन की रचना निहारि देखौ,दाता और सूम दोउ कीन्हें इकसार है.
स्रोत-सत्यापन प्रतीक्षित — This text is pending verification against an authoritative source and may contain errors.