ग़ज़ल

तब न सिधारी साथ, मीड़त है अब हाथ

सेनापति · सब कलाम देखें
तब न सिधारी साथ, मीड़त है अब हाथ,सेनापति जदुनाथ बिना दुख ए सहैं ।चलैं मनोरंजन के, अंजन की भूली सुधि,मंजन की कहा, उनहीं के गूँथे केस हैं ॥बिछुरैं गुपाल, लागै फागुन कराल तातें -भई है बेहाल, अति मैले तन भेस हैं ।फूल्यौ है रसाल, सो तौ भयौ उर साल,सखी डार न गुलाल, प्यारे लाल परदेस हैं ॥
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