ग़ज़ल
लाल-लाल टेसू, फूलि रहे हैं बिसाल संग
लाल-लाल टेसू, फूलि रहे हैं बिसाल संग,स्याम रंग भेंटि मानौं मसि मैं मिलाए हैं।तहाँ मधु काज, आइ बैठे मधुकर-पुंज,मलय पवन, उपबन-बन धाए हैं॥'सेनापति माधव महीना मैं पलास तरु,देखि-देखि भाउ, कबिता के मन आए हैं।आधे अनसुलगि, सुलगि रहे आधे, मानौ,बिरही दहन काम क्वैला परचाए हैं।
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