ग़ज़ल

महा मोहकंदनि में जगत जकंदनि में

सेनापति · सब कलाम देखें
महा मोहकंदनि में जगत जकंदनि में,दिन दुखदुंदनि में जात है बिहाय कै।सुख को न लेस है, कलेस सब भाँतिन को;सेनापति याहीं ते कहत अकुलाय कै.आवै मन ऐसी घरबार परिवार तजौं,डारौं लोकलाज के समाज विसराय कै।हरिजन पुंजनि में वृंदावन कुंजनि में ,रहौ बैठि कहूँ तरवरतर जाई कै.
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